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(30) शामिल हैं। इनके साथ केशरा गांव निवासी मनोज खोवास (39) भी ट्रैकिंग पर गया था। हादसे के बाद से पांचों का पता नहीं चल पाया है। परिजनों के मुताबिक, सभी युवक पहले भी एक साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में चार बार ट्रैकिंग कर चुके थे। रिंटु मंडल एक फैक्टरी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। उनके साथ गए तीन अन्य युवक भी उसी फैक्टरी में काम करते थे। सभी छुट्टी लेकर केदारताल ट्रैक पर पहुंचे थे। रिंटु मंडल के भांजे सुब्रतो मंडल ने बताया कि उनके मामा और उनके दोस्त पहले भी कई बार एक साथ ट्रैकिंग कर चुके थे। हादसे के बाद से परिवार के लोग अपनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लखनऊ
की दो सगी बहनों की मौत केदारताल हादसे में लखनऊ निवासी दीपिका वर्मा और वर्तिका वर्मा की भी जान चली गई। दोनों बहनों को लंबे समय से ट्रैकिंग का शौक था। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पहले ही उन्होंने चमोली जिले की फूलों की घाटी का ट्रैक पूरा किया था। दोनों की तलाश में उत्तराखंड पहुंचे उनके भाई अतुल वर्मा ने शवों की पहचान की। इसके बाद उन्होंने परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी। दो बहनों की एक साथ मौत से परिवार में शोक की लहर है। चार शव बरामद, दो की पहचान बाकी लापता ट्रेकर्स की तलाश में एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की टीमें जुटी हुई हैं। अब तक चार शव बरामद