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इस सीजन में अब तक बर्फबारी न होने के बावजूद अत्यधिक ठंड के कारण गोमुख ट्रैक के सभी नदी-नाले जम चुके हैं। केदार गंगा, ऋषिकुर नाला, पागल नाला और चीड़बासा नाला भी पूरी तरह बर्फ की चादर में तब्दील हो गए हैं। धाम में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और पानी की आपूर्ति के लिए पाले को आग में पिघलाकर व्यवस्था की जा रही है। गंगोत्री धाम में इस समय करीब 25 साधु-संत साधना में लीन हैं। इसके अलावा गंगोत्री नेशनल पार्क के छह कर्मचारी, पुलिस के दो जवान और मंदिर समिति के कर्मचारी भी तैनात हैं। शीतलहर और
जमी जल लाइनों के कारण ड्यूटी करना कर्मचारियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। बर्फबारी और बारिश न होने से क्षेत्र के सेब बागवानों और अन्य काश्तकारों की चिंता बढ़ गई है। सूखे हालात के कारण सेब के बागानों के साथ-साथ मटर और गेहूं जैसी फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे किसान निराश नजर आ रहे हैं। केदारनाथ में बर्फबारी से बढ़ी ठंडदूसरी ओर, केदारनाथ धाम में बीते दिनों हुई जमकर बर्फबारी से पहाड़ियां चांदी की तरह चमक उठीं। दो जनवरी को हुई बर्फबारी के बाद धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे