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निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करके विवाह पंजीकरण करवा सकते हैं। इससे राज्य में रह रहे इन समुदायों के नागरिकों को विवाह पंजीकरण में कानूनी सुविधा मिलेगी। सरकार का तर्क राज्य सरकार ने बताया कि उत्तराखंड नेपाल, भूटान और तिब्बत से सटा हुआ है और इन क्षेत्रों के नागरिक राज्य की सामाजिक-न्याय व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐतिहासिक रूप से इन क्षेत्रों के लोगों के बीच रोटी-बेटी, आवास और शादी विवाह के संबंध रहे हैं। ऐसे में उन्हें यूसीसी प्रक्रिया से वंचित रखना उचित नहीं होगा। यही कारण है कि इन्हें वैकल्पिक दस्तावेज के साथ
पंजीकरण की अनुमति दी गई है। समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम में विवाह और विवाह पंजीकरण।#UCCInUttarakhand #Uttarakhand pic.twitter.com/ZRUEbYK8JI — Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) January 27, 2025 यूसीसी लागू होने के बाद आंकड़े उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता लागू है। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की गति में लगातार वृद्धि देखी गई है। औसतन रोजाना 1,634 विवाह पंजीकृत हो रहे हैं, जबकि शुरुआत में यह संख्या केवल 67 थी। अब तक 4,10,919 विवाह पंजीकृत हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी आज