विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
कि हर बस्ती के पास स्कूल होना राज्य की जिम्मेदारी है। यशपाल आर्य ने X पर (@IamYashpalArya) इस नीति को संविधान का उल्लंघन बताते हुए कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का बंद होना शिक्षा को गांवों से दूर ले जाएगा। यह न केवल शिक्षा विरोधी है, बल्कि सामाजिक न्याय की अवहेलना भी है।" राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और मर्जर का विवाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में स्कूल क्लस्टर की अवधारणा को शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसमें स्कूलों को मर्ज करने या बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। यशपाल आर्य ने तर्क दिया कि उत्तराखंड सरकार की नीति NEP 2020 के दिशानिर्देशों से परे जाकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को सीमित कर सकती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां स्कूल पहले ही दूर-दूर हैं, बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जो सर्दियों में विशेष रूप से कठिन होगा। ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव यशपाल आर्य ने चेतावनी दी कि जिन स्कूलों को "छोटा" कहकर बंद
किया जा रहा है, वे ग्रामीण बच्चों के लिए आत्मविश्वास, सामुदायिक जुड़ाव, और उनकी बुनियादी पहचान का केंद्र हैं। स्कूलों के बंद होने से न केवल बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी, बल्कि शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, और शिक्षणेत्तर कर्मियों के पद भी खत्म हो सकते हैं। उन्होंने X पर यह भी उल्लेख किया कि "ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन स्कूलों की संख्या घटाना न्यायसंगत नहीं है।" निजीकरण और शिक्षा की लागत यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि स्कूल मर्जर की आड़ में सरकार शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। प्राथमिक स्कूलों के बंद होने से ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चे निजी स्कूलों की ओर मजबूर हो सकते हैं, जहां ऊंची फीस शिक्षा को और महंगा बना देगी। उन्होंने कहा, "यह एकलव्य का अंगूठा काटने जैसा है। प्राथमिक स्कूल बंद कर और निजी स्कूलों की फीस बढ़ाकर गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।" विरोध और मांगें यशपाल आर्य के नेतृत्व में शिक्षक संगठनों और स्थानीय समुदायों ने इस नीति के