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रखने के बजाय प्रदूषण के दूसरे प्रमुख स्रोतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कार्ययोजना में यातायात जाम से होने वाले प्रदूषण, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और कच्चे रास्तों से उठने वाले धूल के कणों को नियंत्रित करने जैसे उपाय शामिल किए जा रहे हैं। इसके साथ ही संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर है। ग्रीन दिवाली के लिए चलेंगे जागरूकता अभियान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रस्तावित कार्ययोजना में लोगों को कम आतिशबाजी करने और पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाने के लिए जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने और विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी इसमें शामिल है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने और कच्चे रास्तों को पक्का कर धूल के उत्सर्जन को कम
करने जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके प्रमुख कारणों पर पहले से नियंत्रण किया जा सके। ड्रोन से पानी के छिड़काव जैसे उपायों पर विचार प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव करने जैसे तकनीकी उपायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, ऐसे उपायों की प्रभावशीलता क्षेत्र की परिस्थितियों, मौसम और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही प्रदूषण की निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण में स्टार्टअप और आधुनिक तकनीक की मदद प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर भी तकनीक आधारित समाधानों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में ऐसे स्टार्टअप को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है, जो वायु प्रदूषण की निगरानी, उसके