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संकल्प बना लिया। मंत्रोच्चारण के बीच सरयू में प्रवाहित कीं अस्थियां बागेश्वर पहुंचने के बाद मियाको ने मंदिर के समीप पुजारी की मौजूदगी में पूजा-अर्चना की। करीब 45 मिनट तक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान के बाद उन्होंने रॉबर्ट की अस्थियां सरयू की पवित्र धारा में प्रवाहित कीं। इस दौरान परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। अस्थि विसर्जन के समय मियाको भावुक नजर आईं। उनके लिए यह पल पति की आखिरी इच्छा पूरी करने के साथ-साथ उनकी यादों को बागेश्वर से हमेशा के लिए जोड़ने का भी था। 2005 में योग शिविर में हुई थी मुलाकात रॉबर्ट और मियाको की पहली मुलाकात वर्ष 2005 में एक योग साधना शिविर के दौरान हुई थी। उस समय मियाको जापान में अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। मुलाकात के बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता जीवनसाथी के
संबंध में बदल गया। मियाको के आग्रह पर रॉबर्ट वर्ष 2007 में अमेरिका से जापान चले गए। वहां उन्होंने अंग्रेजी के प्रोफेसर के तौर पर काम किया। इसके बाद वर्ष 2009 में दोनों ने विवाह कर लिया और जापान में साथ रहने लगे। पहली नजर में ही बागेश्वर से जुड़ गया था रिश्ता रॉबर्ट जब पहली बार बागेश्वर पहुंचे तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और आध्यात्मिक माहौल ने उन्हें प्रभावित किया। वर्ष 2007 में वह मियाको के साथ दोबारा बागेश्वर आए और उन्हें भी इस शहर से परिचित कराया। समय के साथ बागेश्वर से रॉबर्ट का लगाव बढ़ता गया। यही कारण रहा कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में बागेश्वर की सरयू नदी को चुना। 2022 में ब्रेन हेमरेज से हुआ निधन वर्ष 2022 में रॉबर्ट को ब्रेन हेमरेज हुआ। लंबे इलाज