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की कमी के चलते परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्हें मेडिकल शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। NMC मान्यता अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर में फंसी निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण मेडिकल कॉलेज NMC के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। अधूरे भवन, अस्पताल सुविधाओं और फैकल्टी की कमी के चलते कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी, जिससे प्रस्तावित MBBS सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। एक महीने में भवन सौंपने का दावा निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर बढ़ते दबाव के बीच जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने काम में तेजी लाने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर श्रमिकों की संख्या बढ़ा दी गई है और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी तेज कर दी गई है। निर्माण एजेंसी का कहना है कि शेष कार्य अगले एक महीने के भीतर पूरा कर भवन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। प्राचार्य ने मांगा जवाब, तय की समयसीमा मेडिकल कॉलेज
की प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया। बैठक में उन्होंने परियोजना पूरी होने की स्पष्ट समयसीमा मांगी, जिस पर एजेंसी ने एक माह के भीतर निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया। डॉ. रावत ने कहा कि कॉलेज भवन जल्द तैयार होना जरूरी है ताकि शेष औपचारिकताएं पूरी कर NMC से मान्यता के लिए दोबारा आवेदन भेजा जा सके। फैकल्टी की भारी कमी बनी बड़ी बाधा मेडिकल कॉलेज में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में सिर्फ 13 फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं। जबकि NMC के मानकों के अनुसार 100 MBBS सीटों के लिए 50 से अधिक शिक्षकों, विभिन्न विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति के साथ अस्पताल, प्रयोगशालाएं और छात्रावास जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण रूप से तैयार होना अनिवार्य है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जताई उम्मीद अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने कहा कि निर्माण कार्य