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NMC की कसौटी पर फेल उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेज, अधूरे प्रोजेक्ट बने बड़ी चुनौती

मुख्य समाचार: रुद्रपुर: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा राजकीय मेडिकल कॉलेज निर्धारित समयसीमा बीत जाने के वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।
करीब साढ़े पांच वर्ष पहले शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अब तक केवल 65 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है।
किच्छा (एजेंसी)। रुद्रपुर: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा राजकीय मेडिकल कॉलेज निर्धारित समयसीमा बीत जाने के वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। करीब साढ़े पांच वर्ष पहले शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अब तक केवल 65 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। निर्माण में लगातार हो रही देरी के कारण कॉलेज को अभी तक नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की मान्यता नहीं मिल पाई है, जिससे एमबीबीएस पाठ्यक्रम की शुरुआत और प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। निर्माण की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक, अस्पताल भवन, छात्रावास और अन्य प्रमुख संरचनाएं अब भी अधूरी हैं। हालांकि प्रगति रिपोर्ट में नियमित निर्माण का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। सूत्रों के अनुसार, निर्माण एजेंसी की लापरवाही और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय
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की कमी के चलते परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्हें मेडिकल शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। NMC मान्यता अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर में फंसी निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण मेडिकल कॉलेज NMC के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। अधूरे भवन, अस्पताल सुविधाओं और फैकल्टी की कमी के चलते कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी, जिससे प्रस्तावित MBBS सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। एक महीने में भवन सौंपने का दावा निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर बढ़ते दबाव के बीच जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने काम में तेजी लाने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर श्रमिकों की संख्या बढ़ा दी गई है और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी तेज कर दी गई है। निर्माण एजेंसी का कहना है कि शेष कार्य अगले एक महीने के भीतर पूरा कर भवन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। प्राचार्य ने मांगा जवाब, तय की समयसीमा मेडिकल कॉलेज
की प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया। बैठक में उन्होंने परियोजना पूरी होने की स्पष्ट समयसीमा मांगी, जिस पर एजेंसी ने एक माह के भीतर निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया। डॉ. रावत ने कहा कि कॉलेज भवन जल्द तैयार होना जरूरी है ताकि शेष औपचारिकताएं पूरी कर NMC से मान्यता के लिए दोबारा आवेदन भेजा जा सके। फैकल्टी की भारी कमी बनी बड़ी बाधा मेडिकल कॉलेज में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में सिर्फ 13 फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं। जबकि NMC के मानकों के अनुसार 100 MBBS सीटों के लिए 50 से अधिक शिक्षकों, विभिन्न विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति के साथ अस्पताल, प्रयोगशालाएं और छात्रावास जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण रूप से तैयार होना अनिवार्य है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जताई उम्मीद अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने कहा कि निर्माण कार्य
की लगातार निगरानी की जा रही है और एजेंसी को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, विधायक शिव अरोरा ने भरोसा जताया कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण शीघ्र पूरा कराकर NMC की मान्यता दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी मेडिकल कॉलेज परियोजना में देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व विधायक तिलक राज बेहड़ ने निर्माण कार्य में देरी के लिए वर्तमान सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि स्वीकृत धनराशि का समय पर उपयोग नहीं किया गया। वहीं, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि केवल घोषणाओं से मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फैकल्टी की भारी कमी के कारण कॉलेज अब तक NMC की मान्यता हासिल नहीं कर सका है। मानकों को पूरा करने की तैयारी प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने कहा कि कॉलेज में भवन निर्माण कार्य और फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही सभी आवश्यक मानक पूरे होंगे, NMC से मान्यता प्राप्त करने के लिए दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द MBBS पाठ्यक्रम शुरू किया जा सके।

📌 मुख्य बिंदु / समाचार सारांश

  • जैसे ही सभी आवश्यक मानक पूरे होंगे, NMC से मान्यता प्राप्त करने के लिए दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द MBBS पाठ्यक्रम शुरू किया जा सके।
  • मानकों को पूरा करने की तैयारी प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने कहा कि कॉलेज में भवन निर्माण कार्य और फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि फैकल्टी की भारी कमी के कारण कॉलेज अब तक NMC की मान्यता हासिल नहीं कर सका है।