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दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके बाद अंतिम यात्रा रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिए रवाना हुई। घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूरे क्षेत्र में 'भारत माता की जय' और 'बलवंत सिंह खेतवाल अमर रहें' के नारों के बीच वीर सपूत को अंतिम विदाई दी गई। उग्रवादियों से लोहा लेते हुए हुए थे शहीद जानकारी के अनुसार, सोमवार को मणिपुर के उखरुल जिले में 40 असम राइफल्स के काफिले पर उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। पहले आईईडी विस्फोट किया गया, जिसके बाद आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल और हवलदार चंद्रमोहन सिंह ने
अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। 1991 में असम राइफल्स में हुए थे भर्ती बलवंत सिंह खेतवाल वर्ष 1991 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे। तीन दशक से अधिक समय तक उन्होंने देश की सेवा की और अंतिम सांस तक अपने कर्तव्य का निर्वहन करते रहे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। बच्चों की पढ़ाई के लिए बस गए थे हल्द्वानी मूल रूप से बागेश्वर जिले के तुपेड (वन डूंगरा) गांव के रहने वाले बलवंत सिंह खेतवाल ने करीब दस वर्ष पहले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए हल्द्वानी के मोतीनगर में अपना