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पहुंचे। 22 साल बाद दोबारा शुरू हुआ उत्खनन बाजपुर रोड स्थित गोविषाण टीला ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस स्थल पर अलग-अलग कालखंडों से जुड़े अवशेष मिलने की बात सामने आती रही है। करीब 22 साल के अंतराल के बाद एएसआई देहरादून की टीम ने 16 जुलाई से यहां दोबारा उत्खनन शुरू किया था। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने गोविषाण टीले पर पहुंचकर विधिवत उत्खनन कार्य का शुभारंभ किया था। विभाग की टीम ने करीब तीन सप्ताह तक अलग-अलग हिस्सों में खुदाई कर पुरातात्विक साक्ष्यों की तलाश की। 10 फीट गहराई में मिले निर्माण अवशेष पुरातत्व विभाग के मुताबिक, अब तक की खुदाई के दौरान करीब 10 फीट की गहराई में कुछ निर्माण अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों की प्रकृति और ऐतिहासिक महत्व को लेकर विशेषज्ञ स्तर
पर आगे जांच की जाएगी। संरक्षक सहायक पुरातत्व विभाग दिनेश शर्मा के अनुसार, 16 जुलाई से 4 अगस्त तक उत्खनन कराया गया। मानसून की लगातार बारिश के कारण खुदाई के काम में बाधा आने लगी, जिसके चलते फिलहाल उत्खनन रोक दिया गया है। बारिश से बचाने के लिए ढके गए खुदाई वाले हिस्से पुरातत्व विभाग ने उत्खनन वाले हिस्से को बारिश से बचाने के लिए मजबूत तिरपाल और पन्नी से ढक दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने और बारिश थमने के बाद सितंबर के मध्य से उत्खनन का काम फिर शुरू कराया जाएगा। ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत में भी मिलता है गोविषाण का उल्लेख गोविषाण टीला उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के पास स्थित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। माना जाता है कि राजा हर्षवर्धन के