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में सबसे अधिक उपयोगी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़कें बंद होने जैसी समस्याओं के कारण कई बार गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। ऐसे में बर्थ वेटिंग होम सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने का एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकते हैं। हालांकि, पर्याप्त सुविधाएं होने के बावजूद इन केंद्रों का उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है। वर्ष 2025 में पूरे राज्य में केवल 299 गर्भवती महिलाओं ने बर्थ वेटिंग होम की सुविधा का लाभ उठाया। तीमारदारों की आय का नुकसान बना था बड़ी वजह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा में सामने आया कि कई परिवार बर्थ वेटिंग होम का उपयोग इसलिए
नहीं करते, क्योंकि गर्भवती महिला के साथ आने वाले परिजन की रोज़गार की दैनिक आय प्रभावित होती है। इसी समस्या को देखते हुए अब तीमारदारों को प्रतिदिन 300 रुपये का डेली वेज देने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा उनके रहने और भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। क्या बोले NHM मिशन निदेशक? एनएचएम के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि बर्थ वेटिंग होम का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ और सड़क सुविधा से वंचित क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अब गर्भवती महिलाओं के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए रहने, भोजन और 300 रुपये प्रतिदिन की आर्थिक सहायता का भी प्रावधान किया गया