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फरवरी के दौरान कई किस्तों में करीब 2.5 लाख रुपये अपने बैंक खातों में जमा करा लिए। जब लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली और आरोपियों ने संपर्क करना बंद कर दिया, तब पीड़िता ने मानखुर्द पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद देहरादून में हुई छापेमारी शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच शुरू की। जांच में मिले डिजिटल सुरागों के आधार पर पुलिस टीम देहरादून पहुंची और यहां संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 9 लैपटॉप, 13 मोबाइल फोन, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संदिग्ध दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। देशभर में फैले नेटवर्क की जांच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह प्रतीत हो रहा है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। यह भी
जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क ने देश के किन-किन राज्यों में लोगों को निशाना बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि जांच में अन्य शहरों या राज्यों में संचालित ऐसे कॉल सेंटरों की जानकारी मिलती है तो वहां भी कार्रवाई की जाएगी। साइबर ठगी के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी हाल के वर्षों में फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। ऐसे गिरोह नौकरी दिलाने, बैंक खाते अपडेट करने, ऑनलाइन शॉपिंग रिफंड, निवेश योजनाओं और तकनीकी सहायता के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं। देहरादून में पकड़ा गया यह कॉल सेंटर भी इसी तरह के संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है। लखनऊ में भी पकड़ा गया अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में भी पुलिस ने एक कथित अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, यह