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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देश पर अवैध, घटिया और दुरुपयोग की आशंका वाली औषधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान ड्रग्स इंस्पेक्टर्स ने एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया, जिसमें सिरप निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और रिकॉर्ड संधारण में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद संबंधित कंपनी में कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर तत्काल रोक लगाते हुए उसका लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया। एफडीए के अनुसार, नैनीताल जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज मामलों में न्यायालय द्वारा चार अभियुक्तों को 12-12 वर्ष के कारावास और कुल 1.20 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है। विभाग का कहना है कि
कोडीन युक्त कफ सिरप जैसी औषधियों के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए निगरानी और प्रवर्तन को और अधिक मजबूत किया गया है। प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप सहित अन्य साइकोट्रॉपिक दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए सभी मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों और वितरण नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है। विभाग की रणनीति केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर एक साथ काम किया जा रहा है। उत्तराखंड एक प्रमुख ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग हब है, हालांकि यहां कोडीन युक्त कफ सिरप का निर्माण सीमित कंपनियों में ही होता है। इन कंपनियों को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन), ग्वालियर द्वारा कोटा आवंटित किया जाता है। मुख्य सचिव स्तर से सीबीएन को पत्र भेजकर यह जानकारी मांगी गई है