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आने-जाने में कुल 14 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बच्चों का कहना है कि सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ता है और वापस लौटते-लौटते शाम के छह से सात बज जाते हैं। भारी स्कूल बैग के साथ रोजाना लंबी पैदल यात्रा के कारण वे बेहद थक जाते हैं और घर पहुंचकर पढ़ाई के लिए समय और ऊर्जा नहीं बचती। मुख्यमंत्री से लगाई सड़क बनाने की गुहार वीडियो में बच्चों ने मुख्यमंत्री से गांव तक सड़क निर्माण कराने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि सड़क बन जाएगी तो स्कूल पहुंचना आसान होगा और उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय भी मिल सकेगा। बच्चों का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आज भी सड़क सुविधा से वंचित है तिमुरी तोक भैंसियाछाना ब्लॉक के खांकारी गूंठ गांव का तिमुरी तोक आज भी सड़क
सुविधा से वंचित है। इसका खामियाजा सिर्फ स्कूली बच्चों को ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भी उठाना पड़ रहा है। गांव के निवासी चंदन नेगी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो ने इस समस्या को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। शिक्षा विभाग ने क्या कहा? वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य में किसी भी स्कूल की दूरी 12 किलोमीटर नहीं है। विभाग के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय अधिकतम दो किलोमीटर की दूरी के भीतर उपलब्ध हैं। हालांकि विभाग ने वायरल वीडियो में बच्चों द्वारा बताई गई परिस्थितियों पर अलग से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। जिला प्रशासन ने दिया सड़क निर्माण पर अपडेट अल्मोड़ा जिला प्रशासन ने बताया कि जिस सड़क की मांग बच्चे कर रहे हैं, उसका प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका