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को बचाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी, जिसमें रूपयों का लेन-देन भी शामिल था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इससे पहले भी हरीश रावत को कई बार नोटिस भेजे जा चुके हैं। सीबीआई का नोटिस मिलने के बाद हरीश रावत ने कसा तंज, कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें याद किया गया। उन्होंने कहा, "लंबे समय बाद सीबीआई के दोस्तों ने मुझे याद किया है। यह लग रहा है कि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। भाजपा के कुछ नेताओं के हाथों सीबीआई ने अपनी स्वतंत्रता और जिम्मेदारी समझौते में
दे दी है। लगता है कि केंद्र सरकार में बैठे लोग अब भी मानते हैं कि मैं चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता हूं।" हरीश रावत ने अक्टूबर माह के दूसरे या तीसरे सप्ताह के लिए समय मांगा है। उन्होंने कहा कि जब वह इस समय किसी यात्रा में नहीं होंगे, तब वे सीबीआई मुख्यालय में बयान रिकॉर्ड कराने के लिए उपस्थित रहेंगे। स्टिंग प्रकरण की पृष्ठभूमि:वर्ष 2016 में हरीश रावत मुख्यमंत्री थे, तब एक स्टिंग ऑपरेशन में वे कथित रूप से विधायकों से लेन-देन की बातचीत करते दिखाई दिए थे। इस प्रकरण से उत्तराखंड की