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के दौरान भाजपा के चार बड़े नेताओं का अरविंद पांडे से मिलने का कार्यक्रम तय होने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार विधायक मदन कौशिक और डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल आज अरविंद पांडे से मुलाकात करने वाले हैं। यह मुलाकात सामान्य नहीं मानी जा रही, क्योंकि इसका समय और राजनीतिक पृष्ठभूमि दोनों ही अहम मानी जा रही हैं। पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड की राजनीति में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड, फिर एक कैबिनेट मंत्री के परिजन के विवादित बयान और उसके बाद उधम सिंह नगर में किसान की आत्महत्या ने सरकार और पार्टी की मुश्किलें बढ़ाईं। अब पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के खिलाफ भूमि अतिक्रमण का मामला सामने आने से भाजपा एक बार फिर विपक्ष और जनता के निशाने पर है। अरविंद पांडे पहले भी धामी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड और किसान आत्महत्या मामले में उन्होंने खुलकर सीबीआई
जांच की मांग की थी। अब जब उन्हीं पर जमीन कब्जाने के आरोप लगे और प्रशासन की कार्रवाई सामने आई, तो इसे सरकार और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जब अरविंद पांडे को 15 दिन के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात या तो अरविंद पांडे को मनाने और पार्टी के भीतर सुलह कराने की कोशिश हो सकती है, या फिर इसे धामी सरकार पर दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। कुछ सियासी विश्लेषक इसे भाजपा के भीतर उभरते गुटबाजी के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि त्रिवेंद्र रावत, अनिल बलूनी समेत कुछ वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में कुमाऊं क्षेत्र के नाराज विधायकों को साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर भी इस मुलाकात