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व्यक्ति को पाया। बच्ची ने आरोप लगाया कि शौचालय में पहले से मौजूद व्यक्ति ने उसके साथ यौन अपराध किया। इसके बाद लोगों ने आरोपी को पकड़कर बच्ची के परिजनों और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने 2 जुलाई 2025 को मुकदमा दर्ज किया। जांच पूरी करने के बाद 29 अगस्त 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया, जबकि 27 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। बच्ची की गवाही बनी अहम साक्ष्य मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसके पिता, स्कूल के प्रधानाचार्य/हेड टीचर, चिकित्सक, विवेचक और पुलिसकर्मी समेत छह गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, पीड़िता ने घटना के संबंध में अपना बयान दर्ज कराया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपी
की पहचान भी की। बच्ची की उम्र निर्धारित करने के लिए स्कूल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र को भी साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, बच्ची की जन्मतिथि 26 अप्रैल 2017 थी और घटना के समय उसकी उम्र करीब आठ वर्ष थी। DNA मैच नहीं हुआ, फिर भी अदालत ने माना दोषी मेडिकल जांच के दौरान बच्ची के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले थे। वहीं, फोरेंसिक जांच में बच्ची के कपड़ों से मिले DNA का आरोपी के DNA से मिलान नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने माना कि केवल DNA का मिलान नहीं होना आरोपी को दोषमुक्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने पीड़िता की गवाही की निरंतरता और विश्वसनीयता के साथ मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का भी