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अनियमितता हुई है। साथ ही मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की गई। हालांकि, मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आरोप केवल शिकायत के स्तर पर हैं और उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बीकेटीसी अध्यक्ष ने गठित कराई जांच समिति सोशल मीडिया पर वायरल दावों और शिकायत का संज्ञान लेते हुए बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के बयान की विस्तार से जांच की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 'निजी सचिव' बताए जाने के दावे का किया खंडन बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का भी खंडन किया, जिनमें एक कर्मचारी को उनका "निजी सचिव" बताया गया था। उन्होंने स्पष्ट
किया कि संबंधित व्यक्ति उनका निजी सचिव नहीं, बल्कि मंदिर समिति का नियमित कर्मचारी है, जो लंबे समय से वैयक्तिक सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। कैसे होती है चढ़ावे की गणना? मंदिर समिति के अनुसार बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे की गणना एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाती है। इस प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों, मंदिर समिति के कर्मचारियों, प्रोटोकॉल अधिकारियों और अन्य अधिकृत सदस्यों की मौजूदगी रहती है। समिति का कहना है कि दान की थैलियां निर्धारित नियमों के तहत खोली जाती हैं और पूरी प्रक्रिया तय प्रोटोकॉल के अनुसार संचालित होती है। सीसीटीवी फुटेज को लेकर अलग-अलग दावे शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित घटना 2 जुलाई को चढ़ावे की गणना के दौरान हुई और यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। वहीं, बीकेटीसी के