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रूप में मनाया जाता है, जो स्वामी विवेकानंद के उस विचार दर्शन को रेखांकित करता है, जिसमें उन्होंने युवाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और मूल्य-आधारित राष्ट्र की आधारशिला बताया था। इसी कड़ी में 12 और 13 जनवरी को ‘मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंथन कार्यक्रम के तहत आईआईटी कानपुर, आईसीएआर–आईएआरआई, आरएलबीसीएयू झांसी, डुवासू मथुरा, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय सहित देश के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से शोधपत्र प्रस्तुति के लिए प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। इसके बाद 14 और 15
जनवरी को राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘उद्भव’ का आयोजन किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का विषय होगा— “डिजिटल अर्थव्यवस्था भारतीय युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से पूरा करने में सक्षम है”। प्रतियोगिता हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से आए प्रतिभागी अपनी विश्लेषणात्मक सोच और वक्तृत्व कौशल का प्रदर्शन करेंगे। डॉ. कश्यप ने बताया कि यह सम्मेलन “सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति: तकनीकी नवाचार से सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र-निर्माण के लिए युवाओं