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बाद उन्होंने मेहनत-मजदूरी कर बेटे को पाला और पढ़ाया, लेकिन वह स्मैक की लत में पड़ गया। रुपये न देने पर वह मारपीट करता, चोरी करने लगा और दो बार जेल जा चुका है। आखिरकार, सुषमा ने मजबूर होकर बेटे को संपत्ति से बेदखल कर दिया। ऐसे कई मामले अब रुद्रपुर में आम हो गए हैं—केस 1: शास्त्रीनगर निवासी नन्हे ने इसी महीने अपने बेटे ओम को बेदखल किया। नन्हे का कहना है कि बेटा शादी के बाद नशे का आदी हो गया है और परिवार को परेशान कर रहा है।केस 2: शिवनगर निवासी प्रेमवती प्रसाद ने अक्तूबर में अपने बेटे सोनू को संपत्ति से बेदखल किया। वह इंजेक्शन का नशा करता
था और घर में मारपीट करता था।केस 3: रंपुरा निवासी रोशन कोली ने अपने इकलौते बेटे रोहन को बेदखल कर दिया क्योंकि वह नशे का आदी होकर चोरी करने लगा था।केस 4: जगतपुरा के केशव मौर्य ने अपने बेटे को घर से निकाल दिया। उनका कहना है कि बेटा आपराधिक गतिविधियों में लिप्त है और हर रात नशे की हालत में घर लौटता है। मनोवैज्ञानिकों की राय:सुशीला तिवारी अस्पताल के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत का कहना है कि बच्चों को संपत्ति से बेदखल करना समस्या का समाधान नहीं है। नशे का उपचार लंबी प्रक्रिया है और परिवार की भूमिका इसमें सबसे अहम होती है। उन्होंने कहा कि परिजनों को बच्चों