विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान (वर्तमान अगस्त क्रांति मैदान) में कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ पारित किया गया था। इसी दिन महात्मा गांधी ने ऐतिहासिक नारा दिया—"करो या मरो", जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया।उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को गांधी जी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल समेत कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन आंदोलन थमा नहीं। अरुणा आसफ अली ने तिरंगा फहराकर जन-आंदोलन को नई ऊर्जा दी, जबकि जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया ने भूमिगत रहकर
इसका नेतृत्व जारी रखा। आंदोलन की पृष्ठभूमि और बलिदान शुक्ला ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि में क्रिप्स मिशन की विफलता और द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की जबरन भागीदारी जैसी घटनाएं थीं, जिनसे देशभर में आक्रोश फैल गया था। महिलाओं, छात्रों, किसानों और मजदूरों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।इस दौरान कनकलता बरुआ और कुशल कोंवर जैसे कई वीरों ने अपने प्राण न्योछावर किए। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट संदेश देने में सफल रहा कि भारत में उनका