विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
और भी आकर्षक बना रहे हैं। लेकिन यह मजेदार दिखने वाला ट्रेंड आपके लिए खतरा भी बन सकता है। आजकल कई एआई टूल्स बाजार में उपलब्ध हैं, जो तस्वीरों को एनिमेशन या कार्टून में बदल देते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब आप अपनी तस्वीरें अपलोड करते हैं, तो वह कहां स्टोर होती हैं? क्या ये सुरक्षित हैं? एआई टेक्नोलॉजी को हल्के में लेना आपकी सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। आपको याद होगा, कुछ समय पहले Clearview AI नामक कंपनी पर यह आरोप लगे थे कि उसने सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स से 3 अरब से अधिक तस्वीरें चुराई और उन्हें प्राइवेट कंपनियों व पुलिस को बेचा। इसी तरह, मई 2024 में ऑस्ट्रेलिया की Outabox कंपनी का डेटा लीक हो गया था, जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों की फेशियल स्कैनिंग, ड्राइविंग लाइसेंस और पते चोरी हो
गए थे। यह डेटा ऑनलाइन लीक होने के कारण हजारों लोग साइबर धोखाधड़ी और पहचान चोरी के शिकार हो गए। अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ एक मनोरंजन का साधन है, तो आप गलत हैं। Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार 2025 तक 5.73 बिलियन डॉलर और 2031 तक 14.55 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं, ताकि वे आपके चेहरे को पहचान सकें और उसका उपयोग कर सकें। मेटा (फेसबुक) और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों का उपयोग अपने एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए करती हैं। PimEyes जैसी वेबसाइट्स किसी भी व्यक्ति की तस्वीर अपलोड कर उसकी पूरी डिजिटल उपस्थिति निकाल सकती हैं। इससे स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और साइबर क्राइम जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। तो सवाल यह