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खून की होली वाली मौलाना की धमकी पर संत समाज में आक्रोश, होली पर मुसलमानों के प्रवेश को लेकर उठी मांग।

मुख्य समाचार: ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- बरेली के एक मौलाना द्वारा होली के अवसर पर कथित रूप से "खून की होली" खेलने की धमकी देने के बाद संत समाज में भारी आक्रोश फैल गया है।
इस मुद्दे को लेकर संतों और हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है।
किच्छा (एजेंसी)। ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- बरेली के एक मौलाना द्वारा होली के अवसर पर कथित रूप से "खून की होली" खेलने की धमकी देने के बाद संत समाज में भारी आक्रोश फैल गया है। इस मुद्दे को लेकर संतों और हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को वृंदावन के चिंतामणि कुंज में संतों की एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें कई हिंदूवादी नेता भी मौजूद रहे। बैठक में संतों ने सर्वसम्मति से
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यह मांग उठाई कि होली के दौरान ब्रज क्षेत्र में मुसलमानों और जिहादी मानसिकता वाले लोगों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। संतों का कड़ा बयान बैठक के बाद संत समाज ने स्पष्ट रूप से कहा कि "ब्रज की होली हमारी परंपरा और आस्था का प्रतीक है। यहां किसी भी प्रकार की हिंसा या जिहादी मानसिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या समुदाय इस पवित्र त्योहार पर खलल डालने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी प्रतिक्रिया
का सामना करना पड़ेगा।" संतों ने प्रशासन से भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने और मौलाना के बयान की जांच कर सख्त कदम उठाने की मांग की। संतों का प्रदर्शन इस मामले को लेकर संत समाज ने एक बार फिर प्रदर्शन किया और प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि ब्रज में होली के दौरान किसी भी असामाजिक तत्व को प्रवेश न मिले। संतों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो
वे बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे। प्रशासन की भूमिका पर सवाल हिंदूवादी संगठनों ने प्रशासन से यह भी सवाल किया कि आखिर ऐसी भड़काऊ बयानबाजी करने वालों पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है, और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

📌 मुख्य बिंदु / समाचार सारांश

  • फिलहाल, इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है, और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।
  • उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
  • प्रशासन की भूमिका पर सवाल हिंदूवादी संगठनों ने प्रशासन से यह भी सवाल किया कि आखिर ऐसी भड़काऊ बयानबाजी करने वालों पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।