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कर गोली मार दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया और मामले में मुकदमा दर्ज कर तत्काल जांच शुरू कर दी। महिला की पहचान शमोली कौशिक के रूप में हुई, जो बरेली के वीर सावरकर नगर रोड की निवासी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने जांच की कमान संभाली। जांच की दिशा बदली: जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला संदिग्ध होता चला गया। घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज, फोटोग्राफ्स और महिला की मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि गोली की चोट वास्तविक नहीं थी। पुलिस की पूछताछ में खुद महिला ने यह स्वीकार कर लिया
कि उसने फर्जी कहानी गढ़ी थी। पुराना रिकॉर्ड भी संदिग्ध: यह पहली बार नहीं था जब महिला ने इस तरह का झूठा मुकदमा दर्ज कराया हो। 2022 में भी उसने गैंगरेप और नशीला पदार्थ खिलाने का झूठा आरोप लगाया था, जिसमें मेयर समेत तीन लोगों को फंसाने की कोशिश की गई थी। वह मामला अब भी न्यायालय में विचाराधीन है। फर्जीवाड़े की प्लानिंग: इस बार महिला ने वार्ड बॉय रोहतास से संपर्क कर एक बुलेट और दो खोखा कारतूस हासिल किए। फिर झोलाछाप डॉक्टर शराफत खां से 2500 रुपये में अपने शरीर में गोली प्लांट करवाई। यह सब कुछ पुलिस को भ्रमित करने और आरोपियों को फंसाने की एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस का