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रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर धमाके हुए। यह इस्लामाबाद से सटा हुआ शहर है। यह एयर बेस पाकिस्तान के लिए काफी अहम है क्योंकि यह उसकी सेना के लिए केंद्रीय परिवहन केंद्रों में से एक है और हवा में ईंधन भरने की क्षमता का घर है। साथ ही, यह पाकिस्तान के रणनीतिक योजना प्रभाग के मुख्यालय से भी कुछ ही दूरी पर है, जो देश के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख और सुरक्षा करता है। परमाणु हमले का संकेत दिया पाकिस्तान ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से लंबे समय से परिचित एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादा डर अपने परमाणु कमान प्राधिकरण के खत्म हो जाने का है। नूर खान पर मिसाइल हमले को एक चेतावनी के रूप में देखा गया कि भारत ऐसा कर भी सकता है। यह साफ नहीं है कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने संघर्ष के तेजी से बढ़ने तथा संभवतः परमाणु हमले की ओर इशारा किया था। हालांकि सार्वजनिक तौर पर परमाणु हमले का एकमात्र स्पष्ट संकेत पाकिस्तान की ओर से आया। पाकिस्तान की हरकत पर सक्रिय हुआ पेंटागन अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन में पाकिस्तान की परमाणु धमकी पर चर्चा हुई। साथ ही व्हाइट हाउस यह भी समझ
चुका था कि कुछ सार्वजनिक बयान और इस्लामाबाद और दिल्ली के अधिकारियों को कुछ फोनकॉल करना ही पर्याप्त नहीं है क्योंकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के हस्तक्षेप का पाकिस्तान पर कोई खास असर नहीं हुआ था। भारत-पाक के बीच एनएसए स्तर की बातचीत नहीं डीजीएमओ स्तर की बातचीत की चर्चा के बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पाकिस्तान से एनएसए स्तर की कोई भी बातचीत नहीं की जाएगी। दरअसल सोशल मीडिया पर लगातार इस पर फेक खबरें भी चल रही हैं कि भारत और पाकिस्तान के एनएसए आपस में बातचीत करेंगे। इस पर विदेश मंत्रालय सूत्रों ने बताया है कि एनएसए स्तर पर कोई बात नहीं होगी। वेंस ने खतरे की बात की, पर पीएम ने कोई वादा नहीं किया ट्रंप प्रशासन इस बात से भी चिंतित था कि तनाव कम करने के संदेश दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों तक नहीं पहुंच रहे थे। इसलिए अमेरिकी अधिकारियों ने फैसला किया कि वेंस को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करनी चाहिए। उनका संदेश यह था कि अमेरिका ने यह आकलन किया है कि हिंसा में नाटकीय वृद्धि होने की बहुत अधिक संभावना है और संघर्ष पूर्ण रूप से युद्ध में तब्दील हो सकता है। अमेरिकी रिपोर्ट के