विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
माना जा रहा है कि हमलावर आतंकी ज्यादा दूर नहीं जा पाए हैं। वह इसी क्षेत्र में लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। उनके जंगल में किसी प्राकृतिक गुफा में या आसपास की किसी बस्ती में छिपे होने की आशंका है। पहलगाम के आसपास बीते सात दिन से जारी तलाशी अभियान के तहत की गई घेराबंदी का दायरा भी अब और तंग कर दिया गया है। लाशी अभियान में खोजी श्वान और ड्रोन की भी मदद ली जा रही है। इसके अलावा पहलगाम के बैसरन और हपतगुंड के ऊपरी हिस्से में अपने मवेशियों के साथ डेरा जमाने वाले खानाबदोश गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के कुछ लोगों को भी चिह्नित किया गया है,
उन्होंने कथित तौर पर हमलावर आतंकियों को देखा है। उन्हें लगा था कि यह निकटवर्ती बस्ती के ग्रामीण हैं, जो ऊपर जंगल में लकड़ी लेने या फिर जड़ी बूटियों की तलाश में आए होंगे। पहलगाम और हपतगुंड के आसपास छिपे हो सकते हैं आतंकी सूत्रों के अनुसार, बैसरन के आसपास के इलाके में विभिन्न चरागाहों में बने कुछ गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के कोठों (अस्थायी आश्रय) की भी तलाशी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पहलगाम, अनंतनाग और उसके साथ सटे इलाकों से 188 संदिग्ध तत्वों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इनमें से अधिकांश पूर्व आतंकी और आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्कर हैं।