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स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इसकी शिकायत दी, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही अवैध खनन पर कोई अंकुश लग पाया है। स्थिति यह हो गई है कि प्रशासनिक आदेश और पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर खनन माफिया जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से 40 से 50 फीट गहरे गड्ढे कर चुके हैं। इससे एक ओर जहां सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इलाके की भौगोलिक स्थिति को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। नदी का प्राकृतिक प्रवाह मोड़ा जा रहा है, जिससे वर्षा ऋतु में बाढ़ की आशंका को बल मिल रहा है। स्थानीय निवासियों को डर है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाली बरसात में नदी का रुख बस्तियों की ओर हो सकता है, जिससे जन-धन की व्यापक हानि हो सकती है। ---------------------- विधायक पांडेय ने दिखाएं उग्र तेवर बीते सप्ताह क्षेत्रीय विधायक अरविंद पांडे ने
अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर अवैध खनन का निरीक्षण किया था। उन्होंने नदी के किनारे बने गहरे गड्ढों को देखकर हैरानी जताई और उच्च अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए। लेकिन इसके बाद भी खनन माफिया के हौसले और बुलंद हो गए हैं। उनका कहना था कि नदी क्षेत्र में हो रहा यह खनन पूरी तरह अवैध है और इससे भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है। ------------------------- प्रशासन के रवैया पर लोगों का आक्रोश स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी, तहसील प्रशासन और पुलिस से लिखित शिकायत भी दी, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। यह उदासीनता न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि खनन माफियाओं को संरक्षण देने की आशंका को भी जन्म देती है। ------------------------ दहशत,पर्यावरण पर छाया संकट खनन से निकली मिट्टी और रेत ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर आसपास के इलाकों में निर्माण कार्यों के लिए भेजी जा रही है। इससे