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किच्छा नगर पालिका चुनाव लटकाने पर हाईकोर्ट बरसा, सरकार से दो दिन में जवाब तलब!

मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
किच्छा (उ.सि.नगर)
14 जून 2025

ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- नैनीताल हाईकोर्ट में किच्छा नगर पालिका चुनाव को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से दो दिन के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब नगर पालिका का आरक्षण तय हो चुका है, तो अब तक चुनाव क्यों नहीं कराए गए? प्रशासक के जिम्मे चल रहा नगर पालिका का काम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि पिछले डेढ़ साल से किच्छा नगर पालिका का कार्य प्रशासक के माध्यम से संचालित हो रहा है। राज्य की अन्य नगर पालिकाओं में चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन किच्छा में अब तक चुनाव नहीं हुए हैं। याचिका में सरकार पर चुनाव टालने का आरोप किच्छा निवासी नईमुल हुसैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सरकार चुनाव को टालने का प्रयास कर रही है। याचिका के अनुसार, 14 दिसंबर 2024 को सरकार ने प्रदेश की 43

मुख्य बिंदु / मांगें
  • 1. वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के साथ किया जाए।
  • 2. क्षेत्र के विकास हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
  • 3. जनहित के अधिकारों की पूर्ण रक्षा की जाए।
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विशेष चित्र (टुडे न्यूज़ 9)

त्वरित कार्रवाई की मांग तेज

प्रशासन नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण अधिसूचना जारी की थी, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका का उल्लेख नहीं किया गया। इस वजह से यह संदेह पैदा हुआ कि सरकार वहां चुनाव नहीं कराना चाहती। हाईकोर्ट ने पहले भी सरकार को दिए थे निर्देश याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकार ने पूर्व में किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों को गांवों में मिला दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बाद में सरकार ने इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया, लेकिन अब चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने सरकार को किच्छा नगर पालिका का आरक्षण तय करने के निर्देश दिए थे। अब आरक्षण भी तय हो चुका है, फिर भी चुनाव नहीं कराए गए, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब

इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष निर्णय लेने का आग्रह किया है ताकि सभी संबंधित पक्षों को नियमानुसार अधिकार प्राप्त हो सकें।