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सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ढाबा संचालक के परिवार को 31 लाख का मुआवजा, कोर्ट ने बीमा कंपनी को भुगतान का दिया आदेश

मुख्य समाचार: रुद्रपुर/काशीपुर: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले अफजलगढ़ निवासी व्यापारी रंजीत सिंह भाटिया के परिजनों को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
काशीपुर की द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अदालत ने बीमा कंपनी को मृतक के परिवार को 31 लाख 12 हजार 611 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
किच्छा (एजेंसी)। रुद्रपुर/काशीपुर: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले अफजलगढ़ निवासी व्यापारी रंजीत सिंह भाटिया के परिजनों को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। काशीपुर की द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अदालत ने बीमा कंपनी को मृतक के परिवार को 31 लाख 12 हजार 611 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। यह ब्याज वाद दायर किए जाने की तिथि से प्रभावी होगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिजनौर जनपद के अफजलगढ़ कस्बे के निवासी और खालसा ढाबा संचालक रंजीत सिंह भाटिया अपनी पत्नी मंजीत कौर के साथ मोटरसाइकिल से बाजपुर स्थित
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डॉ. बीडी पांडे अस्पताल दवा लेने जा रहे थे। 20 अक्टूबर 2020 की सुबह करीब साढ़े नौ बजे, बाजपुर के ग्राम कनौरी के पास एक तेज रफ्तार और लापरवाही से चल रहे ‘छोटा हाथी’ वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि रंजीत सिंह भाटिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना के बाद आरोपी चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। घटना के बाद मृतक का पोस्टमार्टम काशीपुर के सरकारी अस्पताल में कराया गया। मामले में मृतक के भतीजे गोविंद सिंह ने थाना बाजपुर में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में मृतक की पत्नी
मंजीत कौर भाटिया ने अधिवक्ता कैलाश चंद्र प्रजापति के माध्यम से रुद्रपुर जिला जज अदालत में क्षतिपूर्ति का वाद दायर किया, जिसे सुनवाई के लिए द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीतेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत में स्थानांतरित किया गया। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने दलील दी कि मृतक एक सफल व्यवसायी थे और उनकी वार्षिक आय लगभग तीन लाख रुपये थी। साथ ही यह भी कहा गया कि दुर्घटना पूरी तरह वाहन चालक की लापरवाही के कारण हुई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हादसे में शामिल ‘छोटा हाथी’ वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इस आधार पर पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और
जालसाजी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 467 और 468 भी जोड़ दीं और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। वहीं, बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि चालक ने मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है और मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। साथ ही यह भी बताया गया कि इस प्रकरण से जुड़ी एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने मृतक के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।

📌 मुख्य बिंदु / समाचार सारांश

  • इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।
  • दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने मृतक के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया।
  • साथ ही यह भी बताया गया कि इस प्रकरण से जुड़ी एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।