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यह आपसी सहयोग, विश्वास और सामूहिक विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों का उद्देश्य सदस्यों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें सशक्त बनाना है। समिति का संचालन स्वयं सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित होती है। पूर्व विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड की 670 किसान सेवा सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है, जिससे उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। राजेश शुक्ला ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार किया जा सकता है, जो आत्मनिर्भर भारत की
दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों के जरिए किसानों को कृषि कार्यों के लिए एक लाख रुपये और कृषि कार्योत्तर गतिविधियों के लिए तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। वहीं स्वयं सहायता समूहों को भी पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मिलेट्स सहित विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए किसानों को लगभग 25 करोड़ रुपये का भुगतान सहकारी समितियों के माध्यम से किया गया है। उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, उनके लिए बाजार विकसित करने तथा युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में कार्य