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प्रक्रिया में जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया है, तो उन्हें ओपन या अनारक्षित श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा। पीठ ने कहा कि इस मामले में अनारक्षित श्रेणी के लिए अधिसूचित सभी 122 पद पूरी तरह मेरिट के आधार पर भरे गए थे। ऐसे में चयन प्राधिकरण द्वारा आरक्षित श्रेणी के योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के आधार पर अनारक्षित सूची में शामिल करना पूरी तरह सही था। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के 2020 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को मेरिट वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को
हटाकर एक अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनारक्षित श्रेणी की सभी रिक्तियां मेरिट लिस्ट के अनुसार भरी जा चुकी थीं, इसलिए किसी अन्य अनारक्षित उम्मीदवार की नियुक्ति का सवाल ही नहीं उठता। फैसले में यह भी कहा गया कि आरक्षण रोस्टर का उद्देश्य चयन करना नहीं, बल्कि विभिन्न श्रेणियों में रिक्त पदों की संख्या तय करना होता है। ‘अनारक्षित’ श्रेणी किसी विशेष वर्ग का कोटा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से मेरिट पर आधारित एक खुला मंच है, जहां सभी वर्गों के उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर