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आएंगे। जिन स्कूलों की फीस ₹20,000 तक है, वे सभी इस कानून के तहत आएंगे। कैसे तय होगी स्कूल फीस? नए एडमिशन पर स्कूल को फीस तय करने का अधिकार होगा, लेकिन यह स्कूल की कुल आय-व्यय और विकास फंड से अधिक नहीं हो सकती। पुराने छात्रों की फीस बढ़ोतरी केवल शिक्षकों की सैलरी बढ़ने के अनुपात में होगी, जो हर साल अधिकतम 5% या वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से अधिक नहीं होगी। अब स्कूल एक बार में सालभर या दो साल की फीस नहीं वसूल पाएंगे। अगर स्कूल कैंटीन जैसी कोई सुविधा देता है, तो जो छात्र इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनसे उसकी फीस नहीं ली
जाएगी। फीस बढ़ाने से पहले सरकार को देनी होगी जानकारी स्कूलों को हर साल नए सत्र से 2 महीने पहले सरकार को फीस स्ट्रक्चर की जानकारी देनी होगी। इसमें टीचर्स की सैलरी, पिछले साल की फीस और अन्य खर्चों का विवरण देना अनिवार्य होगा। सख्त सजा का प्रावधान पहली बार नियम तोड़ने पर ₹1 लाख का जुर्माना। दूसरी बार उल्लंघन करने पर ₹5 लाख का जुर्माना। तीसरी बार भी मनमानी करने पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी और विकास फंड जब्त कर लिया जाएगा। अभिभावकों को मिलेगा पूरा अधिकार अगर कोई स्कूल तय मानकों से ज्यादा फीस वसूल रहा है, तो वह अभिभावकों को वापस