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किमी के हिस्से को फोरलेन (लागत ₹80.62 करोड़) करने की योजना महज एक सड़क निर्माण नहीं है। यह किच्छा को नेशनल हाईवे से जोड़ने का वह रणनीतिक कदम है, जो यहाँ के व्यापार और भारी वाहनों की आवाजाही को गति देगा। ग्रामीण-शहरी सामंजस्य: अम्बेडकर चौक से दरू मार्ग (9 किमी) का पुनर्निर्माण इस बात का प्रमाण है कि विकास का फोकस केवल मुख्य शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण इलाकों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए गए। खुरपिया और ग्रीनफील्ड सिटी: भविष्य की अर्थव्यवस्था का ब्लूप्रिंट राजेश शुक्ला के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने किच्छा को केवल एक 'विधानसभा क्षेत्र' नहीं बल्कि एक 'इकोनॉमिक जोन' के रूप में देखा। खुरपिया स्मार्ट सिटी: 1002 एकड़ में फैला खुरपिया फार्म प्रोजेक्ट, जिसमें ₹6,180 करोड़ का निवेश और 75,000 रोजगार सृजन की संभावना है, किच्छा के इतिहास का सबसे बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है। इसे राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारे में शामिल कराना यह दर्शाता है कि स्थानीय नेतृत्व ने केंद्र और राज्य के बीच कितना गहरा समन्वय बिठाया। नॉलेज पार्क: 2000 एकड़ में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सिटी और उसमें 250 एकड़ का कौशल एवं नवाचार पार्क यह संकेत देता है कि शुक्ला का
लक्ष्य केवल फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि किच्छा के युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना भी रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा: विजनरी बदलाव का प्रयास अक्सर छोटे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर केवल दवाइयों की उपलब्धता पर चर्चा होती है, लेकिन किच्छा में यह विमर्श 'एम्स' तक पहुँचा। स्वास्थ्य का नया मॉडल: 2017 के दौर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को लेकर हुई आलोचनाओं को राजेश शुक्ला ने एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया। परिणाम स्वरूप, किच्छा में 100 एकड़ में ₹700 करोड़ की लागत से बनने वाला एम्स (AIIMS) सैटेलाइट अस्पताल स्वीकृत हुआ। यह कदम बताता है कि वे केवल छोटी खामियों को ठीक करने के बजाय एक ऐसा सिस्टम खड़ा करना चाहते थे जिससे आने वाली पीढ़ियों को इलाज के लिए दिल्ली या ऋषिकेश न भागना पड़े। शिक्षा का विकेंद्रीकरण: मॉडल डिग्री कॉलेज की स्थापना और उसके लिए भूमि आवंटन का उद्देश्य यही था कि किच्छा का युवा अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके। प्रशासनिक और सामरिक विकास: किच्छा की नई पहचान राजेश शुक्ला के प्रयासों में एक खास बात यह दिखी कि उन्होंने किच्छा को प्रशासनिक रूप से भी मजबूत किया। पंतनगर हवाई अड्डा और कार्गो टर्मिनल: पंतनगर हवाई