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के लिए अधिग्रहित किया था। बाद में यह भारतीय वायुसेना के नियंत्रण में आ गई। फर्जीवाड़े की साजिश साल 1997 में डुमनी वाला गांव की रहने वाली उषा अंसल और उसके बेटे नवीन चंद ने हवाई पट्टी पर फर्जी मालिकाना हक जताया। उन्होंने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया और जाली दस्तावेज़ तैयार करवाए। इसके बाद इस ज़मीन को बेच भी दिया गया। ऐसे हुआ मामले का खुलासा इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश उस समय हुआ जब रिटायर्ड राजस्व अधिकारी निशान सिंह ने इसकी शिकायत की। फिर 2021 में हलवारा एयरफोर्स स्टेशन के कमांडेंट ने भी फिरोजपुर
के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो निशान सिंह ने हाईकोर्ट का रुख किया। जांच में यह सामने आया कि जिस व्यक्ति मदन मोहन लाल के नाम पर ज़मीन थी, उसकी मौत 1991 में ही हो चुकी थी, जबकि ज़मीन के बिक्री दस्तावेज 1997 में बनाए गए। हाईकोर्ट का सख्त रुख पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से जांच के आदेश दिए। साथ ही यह भी कहा गया कि चार हफ्ते के भीतर