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खर्च किए गए। प्रत्येक विद्यालय को इस शिक्षण किट की खरीद के लिए 9,977 रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया था। हालांकि अब इस पूरी खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा मंत्री ने गठित कराई जांच समिति शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मामले का संज्ञान लेते हुए निदेशालय स्तर पर जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित फर्म की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे गंभीर सवाल प्रारंभिक स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, राज्य
के सभी 13 जिलों में 'जादू का पिटारा' की खरीद में खर्च की गई राशि को लेकर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में निविदाएं आमंत्रित किए जाने के बावजूद स्वीकृत बजट के बराबर राशि वाले प्रस्तावों को ही मंजूरी दी गई। इससे प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच की जा रही है। विस्तृत रिपोर्ट तलब प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के.एस. रावत ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच समिति खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों व फर्मों की भूमिका की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। क्या