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से रोका जाए। याचिकाकर्ता पंकज फडनीस ने तर्क दिया कि राहुल के बयान उनके मौलिक कर्तव्यों का उल्लंघन हैं। उन्होंने राहुल गांधी के लंदन भाषण का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि सावरकर मुसलमानों को देशद्रोही मानते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ ने यह याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह राहुल गांधी को सावरकर के योगदान की जानकारी देने का निर्देश नहीं दे सकता। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी बताया कि सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ एक आपराधिक मानहानि मामला पहले से पुणे की
एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित है, इसलिए यह याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान दिलचस्प तर्क सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पंकज फडनीस ने कोर्ट के सामने एक अनोखा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का नेता (LoP) भविष्य में प्रधानमंत्री बन सकता है, इसलिए राहुल गांधी जैसे नेता को सावरकर जैसे राष्ट्रनायकों के खिलाफ गलत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि "आज के युवा प्रधानमंत्री की तुलना में विपक्ष के नेता पर ज्यादा भरोसा करते हैं, ऐसे में राहुल गांधी की टिप्पणियां उन्हें भ्रमित कर सकती हैं।" इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें