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सवाल यही है की शासन-प्रशासन क्यों इन खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है। जब नदियों में मशीनों से खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है, तो फिर प्रदेश में पोकलैंड मशीनों से यह अवैध खनन कैसे चल रहा है? कौन इनको संरक्षण दे रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बागेश्वर जिले के कांडा क्षेत्र में अवैध खड़िया खनन के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट का हस्तक्षेप इस बात को उजागर करता है कि सरकार और प्रशासन किस हद तक भ्रष्टाचार और लापरवाही में डूबे हुए हैं। पर्यावरणीय क्षति, घरों में आई दरारों और प्रभावित ग्रामीणों की पीड़ा के बावजूद
सरकार ने आंखें मूंदे रखीं। "सरकार ने अवैध खनन पर लगाम लगाने का कार्य व शक्तियां निजी हाथों में सौंपी" आर्य ने कहा कि उत्तराखंड में सरकार ने रिवर बेड माइनिंग (नदी के तल में खनन) करने वालों से रॉयल्टी और दूसरे टैक्स वसूलने और अवैध खनन पर लगाम लगाने का कार्य और शक्तियां निजी हाथों में सौंप दी हैं। खनन रॉयल्टी संग्रह के लिए हैदराबाद की निजी कंपनी पावर मेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को आउटसोर्स किया गया है। ये कंपनी ने चार बड़े जिलों - नैनीताल, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और देहरादून में पांच सालों तक रॉयल्टी इकट्ठा