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ने विशेष रूप से हरिद्वार क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, जो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रहा है। यह गतिविधि न केवल राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी खतरे में डाल रही है।" उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय प्रशासन इस समस्या को रोकने में असफल रहा है और अवैध खनन करने वाले माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। रावत ने केंद्र सरकार से अपील की
कि एक स्वतंत्र टास्क फोर्स बनाई जाए, जो अवैध खनन पर रोक लगाने के साथ-साथ दोषियों को सजा दिलाने में प्रभावी भूमिका निभाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम न केवल हरिद्वार, बल्कि पूरे उत्तराखंड के हित में होगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने भाषण में यह भी उल्लेख किया कि अवैध खनन के कारण गंगा नदी का प्राकृतिक स्वरूप खतरे में पड़ गया है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस पवित्र नदी और इसके आसपास के पर्यावरण को बचाएं। इसके लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।" इस मुद्दे को