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ही उन्होंने सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया। लेकिन घर से बाहर निकलने के कुछ ही क्षण बाद हुए धमाके ने सबकुछ तबाह कर दिया। धमाके में दोनों मासूम, जोया और अयान की मौके पर ही मौत हो गई। पिता रमीज खान गंभीर रूप से घायल हो गए। मां उरूसा भी घायल थीं, लेकिन बच्चों को खोने के गम ने शारीरिक दर्द को पीछे छोड़ दिया। होश में आते ही उन्होंने अपने पति को अस्पताल पहुंचाया और फिर अपने बच्चों को खुद दफनाया। “एक पल में उजड़ गई ज़िंदगी” परिवार के करीबी बताते हैं कि रमीज खान, जो पेशे से शिक्षक हैं, अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए ही दो महीने पहले पुंछ में स्कूल के पास किराए पर घर लेकर शिफ्ट हुए थे। यह कदम उनके लिए काल बन
गया। बच्चों की मौसी ने मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि, “काश दोनों में से एक बच्चा बच गया होता, तो शायद जीने का कोई सहारा रह जाता।” उनका कहना था कि सीजफायर चाहे लागू हो गया हो, लेकिन जो जख्म उन्हें मिले हैं, वो ताउम्र नहीं भर सकेंगे। भारत-पाक तनाव के बीच मासूमों की बलि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया। जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सीमावर्ती गांवों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस हमले में पुंछ के जुड़वा मासूमों समेत 20 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई। पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी में एक दो साल की बच्ची