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किए गए। सपनों की कीमत: बेची दुकान और जमीनकरनाल के रजत पाल (20 वर्ष) ने बताया कि उनके पिता की संगोही में मिठाई की दुकान थी। परिवार की उम्मीदों के साथ वह 26 मई को अमेरिका के लिए रवाना हुए। एजेंट ने “गारंटी” के साथ अमेरिका में प्रवेश दिलाने का दावा किया था। इसके लिए उनके भाई विशाल ने एक प्लॉट और दुकान बेचकर करीब 45 लाख रुपये जुटाए और 15 लाख रुपये अतिरिक्त शुल्क भी चुकाया। जंगलों में भूख, ठगी और मौत का डररजत ने बताया कि वे करीब 12–13 लोगों के समूह में पनामा के खतरनाक जंगलों
से गुजरे। वहां भोजन बेहद सीमित था और भूख-प्यास से सभी बेहाल थे। उन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका पहुंचने के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। दो हफ्ते जेल में रहने के बाद 20 अक्टूबर को डिपोर्ट करने की सूचना दे दी गई। रजत ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि कोई भी इस रास्ते से अमेरिका जाने की कोशिश करे। यह रास्ता सिर्फ बर्बादी की ओर ले जाता है।” कर्ज में डूबे परिवार, जेल में बीते महीनेरजत के भाई विशाल ने बताया कि उन्होंने रजत को अमेरिका भेजने के