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फिक्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र), और सुन्नी परंपराओं पर रहा। उन्होंने कई प्रसिद्ध इस्लामी विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की और अपनी विद्वता के लिए जल्द ही पहचाने जाने लगे। धार्मिक और सामाजिक योगदान मार्कज़ुद दावा (जामिया मार्कज़): शेख अबूबकर ने 1978 में केरल के कोझिकोड में मार्कज़ुद दावा की स्थापना की, जो एक प्रमुख इस्लामी शैक्षिक संस्थान है। यह संस्थान इस्लामी और आधुनिक शिक्षा को संयोजित करने के लिए जाना जाता है। मार्कज़ ने हजारों छात्रों को शिक्षित किया है और इस्लामी विद्या, सामाजिक सेवा, और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस संस्थान ने शिक्षा, अनाथों की देखभाल, और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई पहल शुरू की हैं। अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलमा: शेख अबूबकर इस संगठन के महासचिव हैं, जो भारत में सुन्नी मुस्लिम समुदाय के हितों को बढ़ावा देता है और धार्मिक एकता को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने इस संगठन के माध्यम से कई सामाजिक
और धार्मिक सुधारों को लागू किया। मानवीय कार्य: शेख अबूबकर ने कई मानवीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए, 2025 में यमन में केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को टालने में उनकी मध्यस्थता महत्वपूर्ण रही। उनकी पहल और भारत सरकार के सहयोग से यमन सरकार ने निमिषा की सजा को स्थगित किया। वे विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच संवाद और शांति को बढ़ावा देने के लिए भी जाने जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: शेख अबूबकर का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्हें उज्बेकिस्तान के बुखारा शहर में इमाम बुखारी के जन्मस्थान पर सम्मानित किया गया, जो उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है। वे विश्व भर के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम समुदायों द्वारा सम्मानित हैं, जैसा कि X पर कई पोस्ट में उल्लेख किया गया है। ग्रैंड मुफ्ती के रूप में भूमिका नियुक्ति: शेख अबूबकर को 2019 में भारत का ग्रैंड मुफ्ती नियुक्त