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का भुगतान लंबित है, जिसमें अकेले किच्छा केंद्र का करीब 70 करोड़ रुपये शामिल है। भुगतान नहीं मिलने से मिलर्स पर बैंक ऋण, ब्याज और अन्य वित्तीय दायित्वों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2025-26 का करीब 6 लाख क्विंटल चावल अभी तक उतार के लिए लंबित है, जबकि किच्छा केंद्र में ही लगभग 50 हजार क्विंटल चावल का उतार नहीं हो पाया है। मिलर्स ने मांग की कि आगामी धान खरीद सत्र शुरू होने से पहले शेष चावल का उतार और उसका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। राइस मिलर्स ने वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित
प्रतिभूति राशि पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जहां पूर्व वर्षों में लगभग 20 लाख रुपये की प्रतिभूति जमा की जाती थी, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर करीब 2.50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। लंबित भुगतान और आर्थिक दबाव के बीच इतनी बड़ी राशि जमा करना अधिकांश मिलर्स के लिए संभव नहीं है। एसोसिएशन ने आगामी धान खरीद सत्र में मंडी शुल्क का वहन सरकार द्वारा किए जाने तथा पिछले तीन वर्षों से लंबित 0.5 प्रतिशत मंडी शुल्क अंतर की राशि का भुगतान कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा राइस मिलर्स ने करीब 12 वर्षों से 10 रुपये प्रति क्विंटल