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होली का, कौन समझा मिजाज़ होली का?... होली है चोली गोरी रखना संभाल के।... मौज मनाके झूमके गाके आज मनाएं हम होली। हास्य-व्यंग के छोटे-छोटे असरदार मुक्तकों से समाज को बड़े संदेश देते दीपक मुखर्जी दीप ने इस रचना से वाहवाही लूटी- झंझाबाद के सागर मेंइच्छाओं की नावकब डूब गयी पता ही नहीं चलाहम मूकदर्शक बने देखते रहे।। डॉ. धर्मराज यादव ने मानव जीवन में आस्था और विश्वास की महत्ता बताती उत्कृष्ट अतुकांत कविता सुनाकर पूरे सदन की प्रशंसा-सराहना अर्जित की। बताया- आस्था एक मन का नेटवर्क है... जो सब से नहीं जुड़ता है... आस्था एक प्रेम का दृष्टिकोण है... जो विश्वास जैसे ( 5G) नेटवर्क पर ही भरोसा करता है। विश्वास एक राजमार्ग है…….. आस्था का….! संस्थाध्यक्ष एवं संयोजक राम कुमार कोली ने विभिन्न संप्रदायों में एक जैसा संदेश देने का उल्लेख करते हुअ अपना श्रेष्ठ होली गीत सुनाकर प्रशंसा और तालियां बटोरीं- 'होली होली _ होली हो़..अपने
अपने रंग-ढंग से सबने खेली होली हो। वरिष्ठ कवि-पत्रकार गणेश पथिक ने होली गीत और कृष्ण प्रेम पर आधारित ब्रज भाषा के सवैया और घनाक्षरी छंद सुनाकर वाहवाही बटोरी- वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश ठाकुर ने उत्कृष्ट होली गीत और श्रृंगार रस का यह श्रेष्ठ गीत सुनाकर खूब तालियां और वाहवाही बटोरीं-किसी का जनाज़ा चला तो कहीं चली डोली। कहीं सुर्ख जोड़े में लिपटा बदन है। कहीं तन छुपाने की खातिर कफन है। कहीं अलविदा के नारे कहीं आगमन की बोली। किसी ने मोहब्बत में जान गंवा दी। किसी ने मोहब्बत यूं ही गंवा दी। चर्चित कवि प्रकाश 'निर्मल' का गीत भी खूब पसंद किया गया- चांदी जैसे दिन सोने जैसी रातें। कभी खत्म न होने वाली हीर रांझे की बातें। जादू की दुनिया में खुद को कितना और छलें। चलो अब लौट चलें। हिंदी ग़ज़ल को नई धार और चुटीले-व्यंग भरे नए आयाम देने वाले रामकुमार भारद्वाज 'अफरोज़' ने अपने