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एवं व्यापार करने का सपना दिखाया और उसे समझाया कि अगर वह खुद के नाम पर खाता खुलवाएगा, तो उसे आर्थिक लाभ मिलेगा। उनकी बातों में आकर फुरकान ने सीट कवर का व्यापार करने की इच्छा जताई और उन पर भरोसा करते हुए अपने दस्तावेज सौंप दिए। बैंक खाता खुलवाने की आड़ में जालसाजी आरोपियों ने फुरकान को गाड़ी में बैठाकर हल्द्वानी ले गए और वहां भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में "फुरकान इंटरप्राइजेज" नाम की फर्म का खाता खुलवा दिया, इसके बाद संदीप और हरजिंदर ने फुरकान के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक नया सिम कार्ड भी खरीद लिया। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड हासिल कर लिया और उसका पासवर्ड भी बदल दिया, आरोप है कि दोनों आरोपियों ने फुरकान से कई बार चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए
और धीरे-धीरे उसके खाते से लेनदेन शुरू कर दिया। संदेह हुआ तो खुली पोल कुछ दिनों बाद फुरकान ने देखा कि संदीप और हरजिंदर नई-नई गाड़ियों में घूमने लगे। यह देख उसे संदेह हुआ और उसने अपने बैंक खाते की जांच की। बैंक से पता चला कि उसके नाम से खोले गए खाते से अब तक तीन करोड़ रुपये का लेनदेन किया जा चुका है, जब उसने इस बारे में संदीप और हरजिंदर से पूछा तो उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी और उसके बैंक दस्तावेजों व सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल करने लगे। साजिश के तहत फर्जीवाड़ा फुरकान का आरोप है कि संदीप और हरजिंदर ने सोची-समझी साजिश के तहत उसके नाम पर खाता खुलवाया और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके करोड़ों रुपये का लेनदेन किया। जब पीड़ित को एहसास हुआ