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के स्तर पर स्वस्थ व्यक्ति ही वस्तुत: पूर्णत: निरोगी और स्वस्थ है।उन्होंने बताया कि मां की भाव और वैचारिक शक्ति से ही गर्भस्थ भ्रूण के सूक्ष्म शरीर का पोषण, परिवर्धन और विकसन होता है। आज के बच्चे मानसिक, आध्यात्मिक और चेतना के स्तर पर बेहद ही कमजोर हैं। इसका मूल कारण यह है कि माता केवल शिशु की प्रथम पाठशाला ही नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास की आधारभूत संरचना बनाने वाली मुख्य अनुवांशिक वास्तु शिल्पी और अभियंता भी है। "Mother is the genetic engineer of the child." डॉ. संगीता ने याद दिलाया कि मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि वही अपने भाग्य का निर्माता और नियंत्रणकर्ता है। वीडियो क्लिप्स दिखाते हुए उन्होंने साफ किया कि अगर चरित्रवान, देशभक्त, धार्मिक प्रवृत्ति का शिशु पाना चाहते हैं तो गर्भधारण के तीन माह पूर्व से पूरी गर्भावस्था तक माता-पिता को अपने संस्कारों, आचार-व्यवहार, आहार-स्वाध्याय को नियंत्रित-संतुलित रखकर सात्विक जीवनशैली अपनानी ही पड़ेगी। महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा करते हुए डॉ. संगीता सारस्वत ने सलाह दी कि गर्भाधान से तीन माह पहले से पूरी गर्भावस्था में Folic Acid Tablets नियमित रूप से लेना जरूरी है। गर्भकाल में धीमा संगीत, भजन, श्लोक सुनें-सुनाएं। नियमित रूप से धीमा मधुर संगीत सुनने से गर्भस्थ भ्रूण के Neurons विकसित होते हैं। नौवें माह में शिशु भ्रूण मातृ भाषा के अतिरिक्त नई भाषा भी सीख लेने में सक्षम हो जाता है। शिशु को दुग्धपान, भोजन कराते वक्त गायत्री मंत्र का संगीतमय गायन अत्यधिक फलदायी हो सकता है। यह सदी संस्कारवान महिलाओं की ही नहीं, भावनाशील पुरुषों की भी सदी है। उन्होंने बताया कि भोजन और भजन यथासंभव पूरे परिवार के साथ ही करने की आदत डालें। ताजे-मौसमी फल, खासकर पत्तेदार सब्जियों से बना सात्विक भोजन लें। बर्गर, पिज्जा से बचें। ध्यान, जप, आसन, प्राणायाम आदि को सभी अपनी सकारात्मक जीवन शैली का अनिवार्य और अपरिहार्य हिस्सा अवश्य बनाएं।
आधुनिक विकृत जीवन शैली से छुटकारा पाकर ही समस्त शारीरिक-मानसिक समस्याओं से मुक्ति संभव है। इससे पूर्व शांतिकुंज हरिद्वार से आयी टोली नायक श्रीमती सुशीला अग्रिहोरे ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि 21वीं सदी नारी सदी है। इस सदी में मानवमात्र के उज्जवल भविष्य की गारंटी मिलने की घोषणा पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने सन 1920 में ही कर दी थी। गुरुदेव की भविष्यवाणी के अनुरूप ही आज भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। भारत की नारियां पूरे देश-विश्व के हर क्षेत्र में सफलता के परचम लहरा रही हैं। उन्होंने गायत्री परिवार के कार्यकर्ता भाई बहनों से आवाहन किया कि मां गायत्री की नियमित रूप से साधना अवश्य करें। हम सुधरेंगे युग सुधरेगा का संकल्प अपने जीवन में उतारेंगे तभी निश्चित तौर पर जो हमारे गुरुदेव का विचार क्रांति अभियान और युग परिवर्तन का संकल्प पूर्ण हो सकेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश की नारियां सीता जी से प्रेरणा लें। उन्होंने वन में प्रवास करते हुए अभावों के बीच भी बच्चों को संस्कारवान और अपराजेय महायोद्धा बनाने का महान कार्य किया था। श्रीमती सुशीला अग्निहोरे ने बताया कि विश्व भर में सभी लोग अपनी माताओं के संस्कारों से ही संस्कारित- संचालित और नियंत्रित होते हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक शिक्षा के साथ ही बेटों-बेटियों को संस्कारक्षम शिक्षा देना-दिलाना भी अनिवार्य है, तभी हमारी भावी पीढ़ियां संस्कारित बनकर आदर्श समाज और राष्ट्र का निर्माण कर पाएंगी। कहा-गायत्री परिवार के हम सब कार्यकर्ता परमपूज्य गुरुदेव और परम श्रद्धेया माताजी की परिवर्तनकारी युग निर्माण योजना के अजेय सैनिक हैं। अलग-अलग रहने के बजाय एकजुट होकर नियोजित रूप से प्रयास करें तो बड़े सुफल अवश्य मिलेंगे। ध्यान रखें कि गायत्री परिवार छोटा सा कार्यक्रम भी बिना सुदृढ़ पूर्व Slept बनाए नहीं किया जाय। हर कार्यक्रम विचार क्रांति की एक अमिट चिंगारी है। खंडवा की समर्पित कार्यकत्री पूर्णिमा बहन का उदाहरण