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संविधान बदलने की बात करते हैं, ऐसे संगठनों की लोकतांत्रिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।” सांप्रदायिकता फैलाना: उन्होंने आरएसएस पर समाज में नफरत और ध्रुवीकरण फैलाने का आरोप लगाया। मूल मुद्दों पर चुप्पी: उन्होंने सवाल उठाया कि आरएसएस कभी महंगाई, बेरोजगारी और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब क्यों नहीं मांगता? फंडिंग पर सवाल: उन्होंने संघ को मिलने वाले फंड और उसके स्रोतों की जांच की मांग भी की। प्रियांक ने यह भी साफ किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत आरएसएस पर कार्रवाई की जाएगी। तेजस्वी सूर्या को दिया जवाब प्रियांक खड़गे का यह बयान बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के एक पुराने बयान के जवाब में आया है। उन्होंने सूर्या को चुनौती देते हुए कहा:
“अगर हिम्मत है तो कहो कि बीजेपी को RSS की ज़रूरत नहीं है। क्या तुम सिर्फ मोदी और नड्डा के नेतृत्व में काम कर सकते हो?”इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए पीएम से लेकर पंचायत सचिव तक, सब मोदी ही हैं। क्या कांग्रेस पहले भी कर चुकी है ऐसा? यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस ने संघ जैसे संगठनों पर कार्रवाई की बात की हो। कर्नाटक चुनाव 2023: कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल और PFI जैसे संगठनों पर बैन लगाने की बात कही थी, जो नफरत फैलाते हैं। इतिहास में तीन बार बैन: 1948: महात्मा गांधी की हत्या के बाद। 1975: इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार ने। 1992: बाबरी विध्वंस के