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आरोप लगाया गया कि उन्हें विभिन्न कंपनियों से हटा दिया गया है और उनके 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए गए हैं। इस आधार पर उनकी ओर से गिरधारी लाल साहू की याचिका खारिज करने की मांग की गई। वहीं, गिरधारी लाल साहू की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया गया। उनके अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि मुकदमा गलत तथ्यों के आधार पर दर्ज कराया गया है। उन्होंने कभी भी रेखा आर्या को डराया-धमकाया नहीं और न ही किसी प्रकार के फर्जी हस्ताक्षर किए। दलील दी गई कि विभिन्न कंपनियों में उनके शेयर आज भी मौजूद हैं और जिन कंपनियों से उन्हें हटाया गया, वहां उनकी सहमति थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेखा आर्या के
राजनीतिक करियर में उन्होंने पूरा सहयोग किया है। **क्या है पूरा मामला?** गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत और निराधार बताया है। याचिका में कहा गया है कि उनकी शादी वर्ष 2004 में रेखा आर्या से हुई थी और तब से वे साथ रह रहे हैं। इसके बावजूद उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने खुद को अविवाहित बताकर रेखा आर्या से शादी की, जबकि शादी के समय वह पहले से विवाहित थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पद से हटाया गया। इसके अलावा उन पर जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक शब्दों का