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कोर्ट ने सभी पक्षकारों से ट्रस्ट की आय-व्यय, चढ़ावे और संपत्तियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा भेजे गए पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि ट्रस्ट से संबंधित मूलभूत जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये के वार्षिक चढ़ावे के बावजूद ट्रस्ट का नाम, पंजीकरण, कार्यालय का पता,
ट्रस्टियों की संख्या और नियुक्ति संबंधी विवरण प्रशासनिक अभिलेखों में स्पष्ट नहीं हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए एफसीआरए, लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकारी नियंत्रण की मांग याचिका में मांग की गई है कि मंदिर ट्रस्ट को Jageshwar Dham और Badrinath-Kedarnath Temple Committee की तर्ज पर सीमित सरकारी निगरानी में लाया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि धार्मिक ट्रस्टों का पंजीकरण भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत होता है, इसलिए वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और संपत्ति