विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
वहां समान सम्मान और अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे नागरिकों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल किसी भी रूप में उचित नहीं है। हरीश रावत ने कहा कि देश के भीतर लोग रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। देश के निर्माण और विकास में इन प्रवासी लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। उनके योगदान को सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। श्री अखिलेश यादव ने एक दुर्भाग्यजनक टिप्पणी की है। टिप्पणी करते वक्त उनके मानस पटल पर श्री योगी आदित्यनाथ जी का चित्र रहा होगा। वह यह भूल गए कि हम कभी एक राज्य थे। कुछ दुर्भाग्यजनक घटनाओं के बाद बँटवारे के समय में एक सौहार्दपूर्ण वातावरण रहा। जब राज्य एक था, तो किसी ने अपना कर्मक्षेत्र नैनीताल, उधमसिंहनगर, अल्मोड़ा, टिहरी, पौड़ी चुना, तो किसी ने अपना कर्मक्षेत्र इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस, लखनऊ चुना या और स्थान चुने। यह सिद्धांत है कि बँटवारे के वक्त जो जहाँ रह गया, वहीं का वासी है। वह वहाँ का सम्मानित बाशिंदा है और पूर्ण और समान रूप से हकदार है। जो लोग उत्तराखंड में रह गए, वे उत्तराखंड में पूर्ण रूप से सम्मानित हैं और हकदार हैं, और जो उत्तर प्रदेश में रह गए, वे उत्तर प्रदेश में
सम्मानित और हकदार होने चाहिए, तो यह 'घुसपैठिया' शब्द उन नागरिकों पर किसी भी रूप में लागू नहीं होता है और देश के अंदर इस प्रांत के लोग उस प्रांत में, उस प्रांत के लोग किसी और प्रांत में काम करने जाते हैं। देश के निर्माण में ऐसे प्रवासी लोगों या दूसरे प्रांतों से उन प्रांतों में गए हुए लोगों का बहुत बड़ा योगदान है और उनके योगदान को सम्मानपूर्वक देखा जाता है, तो राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हम 'घुसपैठिए' जैसे दुर्भाग्यपूर्ण शब्द का उपयोग किसी रूप में भी वांछित नहीं पाते हैं। भाजपा तो 'घुसपैठिया' शब्द का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग करती है। हमें उनके उकसावे में आने की आवश्यकता नहीं है। #Uttarakhandiyat #Uttarakhand #UttarPradesh #AkhileshYadav #HarishRawat #PoliticalStatement #UnityInDiversity #RespectAll — Harish Rawat (@harishrawatcmuk) October 24, 2026 उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। साथ ही भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का दुरुपयोग करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर भाजपा के उकसावे में आने की आवश्यकता नहीं है। सीएम धामी भी अखिलेश यादव पर साध चुके हैं निशाना अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर उत्तराखंड में भाजपा नेताओं की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर