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था, वह पूरी तरह साकार नहीं हो सका। उनका मानना है कि राज्य को एक अलग पहचान और विकास मॉडल मिलना चाहिए था, लेकिन समय और परिस्थितियों के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे से हटकर काम करने का प्रयास किया था, लेकिन कई कारणों से उन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अपने पूर्व पीएस से जुड़े विवाद पर रावत ने कहा कि उनके खिलाफ अनावश्यक रूप से राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस की आवाज को कमजोर
करने के लिए इस मामले को उनके साथ जोड़ा गया। रावत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति अपना कानूनी पक्ष स्वयं देखेंगे, लेकिन उन्हें इस मामले में घसीटना राजनीतिक हमला है। उन्होंने कहा कि उनकी छह दशक की राजनीतिक यात्रा के दौरान ईमानदारी उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही है और वह अपने ऊपर लगे आरोपों से लड़ाई जारी रखेंगे। कांग्रेस छोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए हरीश रावत ने कहा कि उनका कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार से जुड़ाव वैचारिक है। उन्होंने कहा कि वह जीवनभर कांग्रेस के साथ रहे हैं और आगे भी पार्टी के झंडे के साथ ही