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H5N1: उत्तराखंड में 'कोरोना से भी खतरनाक' वायरस का खतरा बढ़ा,' अधिकारियों ने किया अलर्ट

मुख्य समाचार: पिछले कुछ वर्षों में कोरोना, निपाह और इबोला जैसी बीमारियों ने दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं को चुनौती दी है।
अब उत्तराखंड में एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1 वायरस) का खतरा सामने आया है।
किच्छा (एजेंसी)। पिछले कुछ वर्षों में कोरोना, निपाह और इबोला जैसी बीमारियों ने दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं को चुनौती दी है। अब उत्तराखंड में एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1 वायरस) का खतरा सामने आया है। दो जिलों में फैला संक्रमण उधम सिंह नगर और बागेश्वर जिलों में बर्ड फ्लू के मामले मिले हैं। बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में सैंपलों की जांच के बाद H5N1 वायरस की पुष्टि हुई। पोल्ट्री
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फार्मों में हजारों मुर्गियों की मौत ने प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों के एक किलोमीटर दायरे को सील कर दिया गया है। कड़ी निगरानी और एहतियात प्रशासन ने आसपास के पोल्ट्री फार्मों से भी सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। कर्मचारियों को सफाई, हाथों की सैनेटाइजेशन और संक्रमण से बचाव के अन्य उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में कोविड जैसी सख्ती बरती जा रही है। विश्व स्तर पर बढ़ रहा खतरा
बर्ड फ्लू पहले केवल पक्षियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह इंसानों, गायों और चूहों में भी देखा जा चुका है। हाल ही में कंबोडिया, अमेरिका और ब्रिटेन में इसके मामले सामने आए। भारत में इस साल फरवरी में महाराष्ट्र के कई जिलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। कोविड से ज्यादा संक्रामक? विशेषज्ञों का कहना है कि H5N1 वायरस बेहद खतरनाक हो सकता है। इसे कोविड से 100 गुना ज्यादा संक्रामक बताया गया है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस महामारी का रूप ले सकता है। इंसानों के लिए घातक असर आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों में इस संक्रमण की मृत्यु दर 50% से अधिक हो सकती है। हालांकि इंसानों में संक्रमण फिलहाल दुर्लभ है और अधिकतर मामले संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से ही होते हैं। लक्षणों में तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत और अंगों का फेल होना शामिल है। अभी तक इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है।

📌 मुख्य बिंदु / समाचार सारांश

  • अभी तक इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है।
  • लक्षणों में तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत और अंगों का फेल होना शामिल है।
  • हालांकि इंसानों में संक्रमण फिलहाल दुर्लभ है और अधिकतर मामले संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से ही होते हैं।